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Navodaya Class 6 Result 2023 2nd List : नवोदय विद्यालय क्लास 6 दूसरी लिस्ट जारी

Navodaya Class 6 Result 2023 2nd List:

यदि आप भी नवोदय विद्यालय क्लास 6 में एडमिशन के लिए परीक्षा दिए थे और जवाहर नवोदय विद्यालय की तरफ से क्लास 6 के मेन लिस्ट 21 जून को जारी कर दिया गया था जिसमें आपका सिलेक्शन नहीं हुआ तो अब घबराने की बात नहीं है क्योंकि नवोदय विद्यालय की सेकंड लिस्ट में आपका नाम आ सकता है तो नवोदय विद्यालय की तरफ से दूसरा लिस्ट कब जारी किया जाएगा और कैसे अपना लिस्ट में नाम देखना है जानने के लिए इस पोस्ट को शुरू से लेकर अंत तक पढ़िए 

Navodaya Class 6 Result 2023 2nd List – Full Overview

Name Of Title Navodaya Vidyalaya Class 6 Result 2023
Jnv Exam Date 29 April 2023
Name of Organizers Jawahar Navodaya Vidyalaya Samiti
Admission in Class 6th Class(Class VI)
Name of Exam 2023 Jnvst 2023
Main List Declare  21 June 2023

Navodaya Class 6 Result 2023 2nd List : वेटिंग लिस्ट कब आएगा

जवाहर नवोदय विद्यालय क्लास 6 में एडमिशन के लिए फर्स्ट मेरिट लिस्ट यानि मेन लिस्ट 21 जून 2023 को जारी कर दिया गया था जिसका भी सिलेक्शन नहीं हुआ है यानी मैं लिस्ट में नाम नहीं आया है तो दूसरा लिस्ट में नाम आ सकता है तो नवोदय विद्यालय क्लास 6 का दूसरा लिस्ट किस दिन आएगा इसका जनकारी नवोदय विद्यालय अभी तक नहीं दिया है लेकिन जुलाई के फर्स्ट सप्ताह में नवोदय विद्यालय क्लास 6 का दूसरी लिस्ट जारी होने की पूरी संभावना है 

Navodaya Class 6 Result 2023 2nd List Kaise Dekhen

नवोदय विद्यालय क्लास 6 का दूसरी लिस्ट देखने के लिए नीचे डायरेक्ट लिंक दे दिया गया जहां से लिंक पर क्लिक करके आप अपना दूसरी लिस्ट में नाम देख सकते हैं जैसे ही नवोदय विद्यालय क्लास 6 की दूसरी लिस्ट जारी की जाती है वैसे ही आप नीचे लिंक क्लिक करके अपना डिटेल भरकर दूसरी लिस्ट में नाम देख सकते हैं

Some Important Links

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12th Hindi Putra Viyog (पुत्र वियोग) Subjective Question Answer Bihar Board

07. पुत्र वियोग [ सुभद्रा कुमारी चौहान ]

कविता का सारांश

अपने पुत्र के असामयिक निधन के बाद मां द्वारा व्यक्त की हुई उसके अंदर की व्यथा का इस कविता में सफल निरूपण हुआ। कवयित्री मां अपने पुत्र वियोग में अत्यंत भावुक हो उठती है। उसके अंतर्चेतना को पुत्र का अचानक बिछोह झकझोर देता है। प्रस्तुत कविता में पुत्र के अप्रत्याशित रूप से असमय निधन से मां के हृदय में अपने संताप का हृदय विदारक चित्रण है। एक मां के विषादमय शोक का एक साथ धिरे धिरे गहरता और क्रमशः ऊपर की आरोहण करता भाव उत्कंठा अर्जित करता जाता है। तथा कविता के अंतिम छंद में पारिवारिक रिश्तों के बीच मां बेटे के संबंध को एक विलक्षण आत्म-प्रतीति में स्थायी परिवर्तित करता है। यहां मां की ममता की अभिव्यक्ति का चरमोत्कर्ष है।

कवयित्री अपने पुत्र असामयिक निधन से अत्यंत विकल है। उसे लगता है कि उसका प्रिय खिलौना खो गया है। उसने अपने बेटे के लिए सब प्रकार के कष्ट उठाए पीडीएं झेलीं। उसे कुछ हो न जाय इसलिए हमेशा उसे गोद में लिए रहती थी। उसे सुलाने के लिए लोरियां गाकर तथा थपकी देकर सुलाया करती थी। मंदिर में पूजा अर्चना किया, मिन्नतें मांगी फिर भी वह अपने बेटे को काल के गाल से नहीं बचा सकी। वह विवश है नियति के आगे किसी का वश नहीं चलता। कवयित्री की एकमात्र इच्छा यही है कि पलभर के लिए भी उसका बेटा उसके पास आ जाए अथवा कोई व्यक्ति उसे लाकर उससे मिला दे। कवयित्री उसे अपने सीने से चिपका लेती है तथा उसका सिर सहला-सहलाकर उसे समझाती है। कवयित्री की संवेदना उत्कर्ष पर पहुंच जाती है शोक सागर में डूबती-उतराती बिछोह की पीड़ा और असह्य है। वह बेटा से कहती है कि भविष्य में वह उसे छोड़कर कभी नहीं जाए अपने मृत बेटे को उक्त बातें कहना उसकी असामान्य मनोदशा का परिचायक है। संभवतः उसने अपनी जीवित संतान को उक्त बातें कही हो।

सुभद्रा के प्रतिनिधि काव्य संकलन मुकुल से ली गई। प्रस्तुत कविता पुत्र वियोग कवयित्री मां के द्वारा लिखी गई है। तथा निराला की सरोज स्मृति के बाद हिंदी में एक दूसरा शोकगीत है।

पुत्र के असमय निधन के बाद तड़पते रह गए मां के हृदय के दारुण शोक की ऐसी सादगी भरी अभिव्यक्ति है जो निर्वैयक्तिक और सार्वभौम होकर अमिट रूप से काव्यत्व अर्जित कर लेती है। उसमें एक मां के विवादमय शोक का एक साथ धीरे-धीरे गहराता और ऊपर-ऊपर आरोहण करता हुआ भाव उत्कटता अर्जन करता जाता है तथा कविता के अंतिम छंद में पारिवारिक रिश्तों के बीच मां-बेटे के संबंध को एक विलक्षण आत्म-प्रतीति में स्थायी परिणति पाता है।

सब्जेक्टिव –

1. कवयित्री का खिलौना क्या है ?

उत्तर- कवयित्री का खिलौना उसका बेटा है बच्चों को खिलौना फ्री होता है उसी प्रकार कवयित्री मां के लिए उसका बेटा उसके जीवन का सर्वोत्तम उपहार है इसलिए वह कवयित्री का खिलौना है।

2. कवयित्री स्वयं को असहाय और विवश क्यों कहती है ?

उत्तर- कवयित्री स्वयं को असहाय तथा विवश इसलिए कहती है कि उसने अपने बेटे की देखभाल तथा उसके लालन-पालन पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया। अपने सुविधा और असुविधा का कभी विचार नहीं किया। बेटा को ठंड न लग जाए बीमार न पड़ जाए इसलिए सदैव उसे गोदी में रखा इन सारी सावधानियों तथा मंदिर में पूजा-अर्चना से वह अपने बेटे की असमय मृत्यु नहीं टाल सकी। नियमि के आगे किसी का वश नहीं चलता अतः वह स्वयं को असहाय तथा बेबस मां कहती है।

सभी सब्जेक्ट का PDF Notes लेने के लिए WhatsApp पर मैसेज करें – 8298209813

3. पुत्र के लिए मां क्या-क्या करती है ?

उत्तर- पुत्री के लिए मां निजी सुख दुख भूल जाती है उसे अपने सुख सुविधा के विषय में सोचने की अवकाश नहीं रहता। वह बच्चे के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का पूरा ध्यान रखती है बेटा को ठंड ना लग जाए अथवा बीमार न पड़ जाए इसके लिए उसे सदैव गोद में लेकर उसका मनोरंजन करती रहती है। उसे लोरी गीत सुनाकर सुलाती है उसके लिए मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करती है। तथा मन्नतें मांगती है।

4. मां के लिए अपना मन समझाना कब कठिन है और क्यों ?

उत्तर- मैथिली अपने मन को समझा ना तब कठिन हो जाता है जब वह अपना बेटा को देती है बेटा मां की अमूल्य धरोहर होता है बेटा मां की आंखों का तारा होता है मां का सर्वस्व यदि क्रूर नियति द्वारा उसे छीन लिया जाता है उसके बेटे की मृत्यु हो जाती है तो मां के लिए अपने मन को समझाना कठिन होता है।

5. पुत्र को छोना कहने से क्या भाव हुआ है इसे उद्घाटित करें ?

उत्तर- छौना का अर्थ होता है हिरन आदि पशुओं का बच्चा पुत्र वियोग शीर्षक कविता में कवयित्री ने छीना शब्द का प्रयोग अपने बेटा के लिए किया है। हिरण अथवा बाघ का बच्चा बड़ा भोला तथा सुंदर दिखता है। इसके अतिरिक्त चंचल तथा तेज भी होता है अतः कवयित्री द्वारा अपने बेटा को छौना कहने के पीछे यह विशेष अर्थ भी हो सकता है।

6. अर्थ स्पष्ट करें ?

आज दिशाएं भी हंसती है,

है उल्लास विश्व पर छाया,

मेरा खोया हुआ खिलौना,

अब तक मेरे पास ना आया

उत्तर- आज सभी दिशाएं पुलकित है सर्वत्र प्रसन्नता छाई हुई है। सारे विश्व में उल्लास का वातावरण है किंतु मेरा खोया हुआ खिलौना अब मुझे प्राप्त नहीं हुआ अर्थात कवयित्री के पुत्र का निधन हो गया है इस प्रकार वह उससे छिन गया है यह उसकी व्यक्तिगत क्षति है विश्व के अन्य लोग हर्षित हैं सभी दिशाएं भी उल्लासित दिख रही है किंतु कवयित्री ने अपना बेटा खो दिया है उसकी मृत्यु हो चुकी है वह उद्विग्न हैं शोक विह्वल है। अपनी असंयमित मनोदशा में वह बेटा के वापस आने की प्रतीक्षा करती है और नहीं लौट कर आने पर निराश हो जाती हैं।

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12th Class Hindi Tumul Kolahal kalah me (तुमुल कोलाहल कलह मे) Subjective Questions Answers

तुमुल कोलाहल कलह में [ जयशंकर प्रसाद]

कविता का सारांश

प्रस्तुत कविता तुमुल कोलाहल कलह में शीर्षक कविता में छायावाद के आधार कवि श्री जयशंकर प्रसाद के कोलाहलपूर्ण कलह के उच्च स्तर से व्यथित मन की अभिव्यक्ति है। बिंदु कवि निराश तथा हतोत्साहित नहीं है।

कवि संसार की वर्तमान स्थिति से क्षुब्य अवश्य है किंतु उन विषमताओं एवं समस्याओं में भी उन्हें आशा की किरण दृष्टिगोचर होती है। कवि की चेतना विकल होकर नींद के पूल को ढूंढने लगती है। उस समय बहुत थकी-सी प्रतीत होती है किंतु चंदन की सुगंध से सुवासित शीतल पवन उसे संबल के रूप में सांत्वना एवं स्फूर्ति प्रदान करती है। दुःख में डूबा हुआ अंधकारपूर्ण मन जो निरंतर विषाद से परिवेष्टित है। प्रातः कालीन खिले हुए पुष्पों के सम्मिलन से उल्लसित हो उठा है। व्यथा का घोर अंधकार समाप्त हो गया है। कवि जीवन की अनेक बाधाओं एवं विसंगतियों का भुक्तभोगी एवं साक्षी है। कवि अपने कथन की सम्पुष्टि के लिए अनेक प्रतीकों एवं प्रकृति का सहारा लेता है। यथा मरु-ज्वाला, चातकी, घटियां पवन को प्राचीर झुलसावै विश्व दिन, कुसुम ऋतु रात, नीरधर अश्रु-सर मधु मरन्द मुकलित आदि।

इस प्रकार कवि ने जीवन के दोनों पक्षों का सूक्ष्म विवेचन किया है। यह अशांति और असफलता अनुपयुक्तता तथा अराजकता से विचलित नहीं है।

सब्जेक्टिव –

1. हृदय की बात का क्या कार्य है 

उत्तर- चाहती है। ऐसे विषादपूर्ण समय में श्रद्धा चंदन के सुगंध से सुवासित हवा बनकर चंचल मन को इस कोलाहलपूर्ण वातावरण में श्रद्धा जो वस्तुतः कामायनी है अपने हृदय का सच्चा मार्गदर्शक बनती है। कवि का हृदय कोलाहलपूर्ण वातावरण में जब थककर चंचल चेतनाशून्य अवस्था में पहुंचकर नींद की आगोश में समाना सांत्वना प्रदान करती है। इस प्रकार कवि को अवसाद एवं अशांतिपूर्ण वातावरण में भी उज्जवल भविष्य सहज ही दृष्टिगोचर होता है।

2. कविता में उषा की किस भूमिका का उल्लेख है ?

उत्तर-छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित तुमुल कोलाहल कलह में शीर्षक कविता में उषा काल की एक महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया गया है। उषाकाल अंधकार का नाश करता है। उषाकाल के पूर्व संपूर्ण विश्व अंधकार में डूबा रहता है उषाकाल होते हुए सूर्य की रोशनी अंधकार रूपी जगत में आने लगती है सारा विश्व प्रकाशमय हो जाता है सभी जीव जंतु अपनी गतिविधियां प्रारंभ कर देते हैं। जगत में एक आशा एवं विश्वास का वातावरण प्रस्तुत हो जाता है उषा की भूमिका का वर्णन कवि ने अपनी कविता में की है।

3. चातकी किसके लिए तरसती है ?

उत्तर- चातकी एक पक्षी है जो स्वाति की बूंद के लिए तरसती है। चातकी केवल स्वाति का जल ग्रहण करती है। वह सालोंभर स्वाति के जल की प्रतीक्षा करती रहती है और जब स्वाति का बूंद आकाश से गिरता है तभी वह जल ग्रहण करती है। इस कविता में यह उदाहरण संकेतिक है। दुखी व्यक्ति सुख प्राप्ति को आशा में चातकी के समान उम्मीद बांधे रहते हैं। कवि के अनुसार एक न एक दिन उनके दुखों का अंत होता है।

4. बरसात की सरस कहने का क्या अभिप्राय है ?

उत्तर- बरसात जलों का राजा होता है। बरसात में चारों तरफ जल ही जल दिखाई देते हैं। पेड़ पौधे हरे भरे हो जाते हैं लोग बरसात में आनंद एवं सुख का अनुभव करते हैं उनका जीवन सरस हो जाता है। अर्थात जीवन में खुशियां आ जाती है खेतों में सब फसल लहराने लगते हैं किसानों के लिए समय तो और भी खुशियां लानेवाला होता है इसलिए कवि जयशंकर प्रसाद ने बरसात को सरस कहां है।

5. सजल जलजात का क्या अर्थ है ?

उत्तर- सजल जलजात का अर्थ जल भरे (रस भरे) कमल से है मानव जीवन आंसुओं का सराबोर है। उसमें पुरातन निराशारूपी बादलों की छाया पड़ रही है उस चातकी सरोवर में ऐसा एक ऐसा जल से पूर्ण कमल है जिस पर भौर मंडराते हैं और जो मकरंद (मधु) से परिपूर्ण है।

6. काव्य सौंदर्य स्पष्ट करें ?

पवन की प्राचीर में रुक,

जला जीवन जा रहा झुक,

इस झूलसते विश्व वन की,

मैं कुसुम ऋतु राज रे मन !

उत्तर- जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित यह पद्यांश छायावादी शैली का सबसे सुंदर आत्मगान है। इसकी भाषा उच्च स्तर की है। इसमें संस्कृतनिष्ठ शब्दों का अधिक प्रयोग हुआ है यह गद्यांश सरल भाषा में न होकर संकेतिक भाषा में प्रयुक्त है। प्रकृति का रोचक वर्णन इस पद्यांश में किया गया है इसमें रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है जैसे विश्व वन (वनरूपी विश्व) इसमें अनुप्रास अलंकार का भी प्रयोग हुआ है। अनुप्रास अलंकार के कारण पद्यांश में अद्भुत सौंदर्य आ गया है।

जहां मरू ज्वाला धधकती,

चातकी कन को तरसती,

उन्हें जीवन घाटियों की,

मैं सरस बरसात रे मन !

उत्तर- प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि जहां मरुभूमि की ज्वाला धधकती है और चातकी जल के कण को तरसती है। उन्हें जीवन की घाटियों में मैं आशा सरस बरसात बन जाती है। कवि का भाव है कि जिन लोगों का जीवन मरुस्थल की सूखी घाटी के समान दुर्गम विषम और ज्वालामाय हो गया है जहां चातकी को एक कण भी सुख का जल नहीं मिला हो उन्हें आशा की एक किरण मात्र मिल जाने से जीवन में रस की वर्षा होने लगती है।

Chhapay(छप्पय) Subjective Question Answer of 12th Class Hindi(100Marks)

04. छप्पय [ नाभादास ]

कविता का सारांश

छप्पय शीर्षक पद कबीरदास एवं सूरदास पर लिखे गए छप्पय भक्तमाल से संकलित है। छप्पय एक छंद है जो छः पंक्तियों का गेय पद होता है। ये छप्पय नाभादास की अंतर्दृष्टि मर्मग्रहणी प्रज्ञा, सारग्राही चिंतन और विदग्ध भाषा- शैली के नमूने हैं। प्रस्तुत छप्पय में वैष्णव भक्ति के नितांत भिन्न दो शाखाओं के इन महान भक्त कवियों पर लिखे गए छंद है। इन कवियों से संबंधित अबतक के संपूर्ण अध्ययन-विवेचन के सार-सूत्र इन छंदों से कैसे पूर्वकथित है यह देखना विस्मयकारी और प्रीतिकार है। ऐसा प्रतीत है कि आगे की शतियों में इन कविता पर अध्ययन विवेचन की रूपरेखा जैसे तय कर दी गई हो। पाठ के प्रथम छप्पय में नाभादास ने आलोचनात्मक शैली में कबीर के प्रति अपने भाव व्यक्त किये हैं। कवि के अनुसार कबीर ने भक्ति विमुख तथाकथित धर्मों की धज्जी उड़ा दी है। उन्होंने वास्तविक धर्म को स्पष्ट करते हुए योग यज्ञ व्रत दान और भजन के महत्व का बार-बार प्रतिपादन किया है। उन्होंने अपनी सबदी साखियों और रमैनी में क्या हिंदू और क्या तुर्क सबके प्रति आदर भाव व्यक्त किया है। कबीर के वचनों में पक्षपात नहीं है। उनमें लोक मंगल की भावना है कबीर मुंह देखी बात नहीं करते। उन्होंने वर्णाश्रम के पोषक षट दर्शनों की दुर्बलताओं को तार-तार करके दिखा दिया है।

छप्पय में कवि नाभादास में सूरदास जी की कृष्ण की भक्ति भाव प्रकट किये हैं। कवि का कहना है कि सूर की कविता सुनकर कौन ऐसा कवि है जो उसके साथ हामी नहीं भरे सूर की कविता में श्री कृष्ण की लीला का वर्णन है। उनके जन्म से लेकर स्वर्गधाम तक की लीलाओं का मुक्त गुणगान किया गया है। उनकी कविता में क्या नहीं है। गुण माधुरी और रूप माधुरी सब कुछ भरी हुई है। सूर की दृष्टि दिव्य थी वही दिव्यता उनकी कविताओं में भी प्रतिम्बित हैं गोप-गोपियों के संवाद के अद्भुत प्रीति का निर्वाह दिखाई पड़ता है। शिल्प की दृष्टि से उक्त क्षत्रिय वर्ण वैचित्र्य, वय वैचित्र्य और अनुप्रसों की अनुपम छटा सर्वत्र दिखायी पड़ता है।

सब्जेक्टिव –

1. नाभादास ने छप्पय में कबीर की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है उनकी क्रम सूची बनाइए ?

उत्तर- नाभादास ने कबीर की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है-

1. कबीर की मती अति गंभीर और अंतःकरा भक्ति रस से सरस था।

2. वे जाति पाति एवं वर्णाश्रम का खंडन करते थे।

3. कबीर ने केवल भगवत भक्ति को ही श्रेष्ठ माना है। 4. भगवत भक्ति के अतिरिक्त जितने धर्म है उन सब को कबीर ने अधर्म कहा है।

5. सच्चे हृदय से सप्रेम भजन के बिना तप योग यज्ञ दान व्रत सभी को कवि ने सबको तुच्छ बताया।

6. कबीर ने हिंदू मुसलमान दोनों को प्रमाण तथा सिद्धांत की बातें सुनाई है।

2. मुख देखी नाहीं भनी का क्या अर्थ है कबीर पर यह कैसे लागू होता है ?

उत्तर- कबीरदास सिद्धांत की बात करते हैं वे कहते हैं कि मुख को देखकर हिंदू मुसलमान होने का अनुमान नहीं लगाया जाता। वहीं उनके हित की बात बताते हैं कि भक्ति के द्वारा ही भवसागर से पार उतारा जा सकता है वे सभी को भगवदभक्ति का उपदेश देते हैं।

3. सूर के काव्य की किन विशेषताओं का उल्लेख कवि ने किया है ?

उत्तर- कवि ने सूर के काव्य की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है-

1. सूर के कवित्त को सुनकर सभी प्रशंसा पूर्वक अपना सिर हिलाते हैं।

2. सूर की कविता में बड़ी भारी नवीन युक्तियां चमत्कार चातुर्य अनूठे अनुप्रास और वर्णों के यथार्थ की उपस्थिति है।

3. कवित्त के प्रारंभ से अंत तक सुंदर प्रवाह दर्शनीय हैं।

4. तुकों का अद्भुत अर्थ दिखाता है।

5. सूरदास ने प्रभु कृष्ण का जन्म कर्म गुण रूप सब दिव्य दृष्टि से देखकर अपनी रसना से उसे प्रकाशित किया।

4. कबीर ने भक्ति को कितना महत्व दिया ?

उत्तर- कबीर ने अपनी सबदी साख और रमैनी द्वारा धर्म की सटीक व्याख्या प्रस्तुत की लोक जगत में पर्याप्त पाखंड व्यभिचार मूर्ति पूजा और जाति पाति छुआछूत का प्रबल विरोध किया उन्होंने योग यज्ञ व्रत दान और भजन की सही व्याख्या कर उसके समक्ष उपस्थित किया।

कवि ने भक्ति में पाखंडवादी विचारों की जमकर खिल्लियां उड़ाई और मानव मानव के बीच समन्वयवादी संस्कृति की स्थापना की लोगों के बीच भक्ति के सही स्वरूप की व्याख्या की भक्ति की पवित्र धारा को बहाने उसे अनवरत गतिमय रहने में कबीर ने अपने प्रखर विचारों से उसे बल दिया उन्होंने विधर्मियों की आलोचना की भक्ति विमुख लोगों द्वारा भक्ति की परिभाषा गढ़ने तीव्र आलोचना की। भक्ति के सत्य स्वरूप का उन्होंने उद्घाटन किया और जन-जन के बीच एकता भाईचारा प्रेम की अजस्र गंगा बहायी। वह निर्गुण विचारधारा के तेजस्वी कवि थे उन्होंने ईश्वर के निर्गुण स्वरूप का चित्रण किया उसकी सही व्याख्या की सत्य स्वरूप का सबको दर्शन कराया।

Tulsidas ke pad Class 12th Hindi | तुलसीदास के पद का सभी प्रश्न उत्तर

03. पद [ तुलसीदास ]

कविता का सारांश

प्रस्तुत दोनों पदों में महाकवि तुलसीदास की अपने आराध्य भगवान श्री राम के प्रति अटूट एवं अडिग आस्था प्रकट हुई है। इन पदों में कवि की काव्य और कला संबंधित विशिष्ट प्रतिभा की अद्भुत झलक मिलती है।

प्रथम पद कवि द्वारा रचित विनय पत्रिका के सीता स्तुति खंड से उद्धृत है। कवि ने राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न आदि की विधिपूर्वक स्तुति करने के बाद सीताजी की स्तुति की है। उसने सीता को मां कहकर संबोधित करते हुए अपनी भक्ति और श्री राम के मध्य माध्यम बनने का विनम्र अनुरोध किया है जिससे उसके आराध्य श्री राम उसकी भक्ति से प्रवाहित होकर उसका इस भवसागर से उद्धार कर दें। उसने उचित समय पर ही अपने अनुरोध को श्रीराम के समक्ष प्रस्तुत करने की प्रार्थना की है जिससे वे दयार्द्र हो उसकी भी बिगड़ी बना दें।

द्वितीय पद में कवि ने श्री राम के प्रति अटूट विश्वास एवं अडिग आस्था प्रकट करते हुए उनसे अपनी दीन-हीन अवस्था का वर्णन किया है। वह अपने आराध्य देव से अत्यंत विनम्रता पूर्वक उनकी अनुकम्पा का एक टुकड़ा पाने की आकांक्षा से भीख मांग रहा है। वह अपने प्रभु की भक्ति सुधा से अपना पेट भर लेना चाहता है।

सब्जेक्टिव – 

1. कबहुँक अंब अवसर पाई। यहां अब संबोधन किसके लिए है ? इस संबोधन का मर्म स्पष्ट करें ?

उत्तर- उपर्युक्त पंक्ति में अंब का संबोधन मां सीता के लिए किया गया है गोस्वामी तुलसीदास ने सीता जी को सम्मानसूचक शब्द अंब के द्वारा उनके प्रति सम्मान की भावना प्रदर्शित की है।

2. प्रथम पद में तुलसीदास ने अपना परिचय किस प्रकार दिया है लिखें ?

उत्तर- प्रथम पद में तुलसीदास ने अपने विषय में हीनभाव प्रकट किया है। अपनी भावना को व्यक्त करते हुए कहते हैं कि वह दीन पानी दुर्बल मलिन तथा असहाय व्यक्ति है। वे अनेकों अवगुणों से युक्त है। अंगहीन से उनका आशय संभवतः असहाय होने से है।

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3. तुलसीदास जी सीता से कैसी सहायता मांगते हैं ?

उत्तर- तुलसीदास मां सीता से भवसागर पार कराने वाले श्री राम को गुणगान करते हुए मुक्ति प्राप्ति की सहायता की याचना करते हैं। हे जगत की जननी अपने वचन द्वारा मेरी सहायता कीजिए।

4. तुलसीदास सीधे राम से न कहकर सीता से क्यों कहलवाना चाहते हैं ?

उत्तर- ऐसा संभवतः तुलसीदास इसलिए चाहते थे क्योंकि

1. उनको अपनी बातें स्वयं राम के समक्ष रखने का साहस नहीं हो रहा होगा वह अनुभव कर रहे होंगे।

2. सीताजी सशक्त ढंग से उनकी बातों को भगवान श्री राम के समक्ष रख सकेगी ऐसा प्रायः देखा जाता है कि किसी व्यक्ति से उनकी पत्नी के माध्यम से कार्य करवाना अधिक आसान होता है।

3. तुलसी ने सीताजी को मां माना है तथा पूरे रामचरितमानस में अनेकों बार मां कहकर ही संबोधित किया है अतः माता सीता द्वारा अपनी बातें राम के समक्ष रखना ही उन्होंने श्रेयस्कर समझा।

5. राम के सुनते ही तुलसी की बिगड़ी बात बन जाएगी, तुलसी के इस भरोसे का क्या कारण है ?

उत्तर- गोस्वामी तुलसीदास राम की भक्ति में इतना अधिक निमग्न थे कि वह पूरे जगत को राममय पाते थे सिवा राममय सब जग जानि यह उनका मूल मंत्र था। अतः उनका यह दृढ़ विश्वास था कि राम दरबार पहुंचते ही उनकी बिगड़ती बातें बन जाएंगे अर्थात राम ज्योंहि उनकी बातों को जान जाएंगे उनकी समस्याओं एवं कष्टों से परिचित होंगे वह इसका समाधान कर देंगे उनकी बिगड़ती हुई बातें बन जाएंगे।

6. दूसरे पद में तुलसी ने अपना परिचय किस तरह दिया है लिखें ?

उत्तर- दूसरे पद में तुलसीदास ने अपना परिचय बड़ी-बड़ी बातें करने वाला अधम कहां है छोटा मुंह बड़ी बात करने वाला व्यक्ति के रूप में स्वयं को प्रस्तुत किया है। जो कोढ़ में खाज की तरह है।

7. दोनों पदों में किस रस की व्यंजना हुई है ?

उत्तर- दोनों पदों में भक्ति रस की व्यंजना हुई है तुलसीदास ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम तथा जगत जननी सीता की स्तुति द्वारा भक्ति भाव की अभिव्यक्ति इन पदों में की है।

8. तुलसी के हृदय में किसका डर है ?

उत्तर- तुलसी की दयनीय अवस्था में उनके सगे संबंधियों आदि किसी ने भी उनकी सहायता नहीं की उनके हृदय में इसका संताप था इससे मुक्ति पाने के लिए उन्हें संतों की शरण में जाना पड़ा और उन्हें वहां इसका आश्वासन भी मिला कि श्री राम की शरण में जाने से सब संकट दूर हो जाते हैं।

9. तुलसी को किस वस्तु की भूख है ?

उत्तर- तुलसी जी गरीबों के त्राता भगवान श्रीराम से कहते हैं कि हे प्रभु मैं आपकी भक्ति का भूख जनम-जनम से हूं। मुझे भक्तिमयी अमृत का पान कराकर क्षुधा की तृप्ति कराइए।

10. प्रथम पद का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए ?

उत्तर- प्रथम पद में तुलसीदास सीता जी को मां कह कर संबोधित करते हैं वे कहते हैं कि मां ! जब कभी आप उचित अवसर समझे तब कोई करुण प्रसंग चलाकर श्री राम की दयार्द्र मनःस्थिति में मेरी याद दिलाने की कृपा करना तुलसीदास अपनी दयनीय स्थिति श्री राम को बताकर अपने बिगड़ती बात बनाना चाहते हैं। अर्थात वे अपने दुर्दिनों का नाश करना चाहते हैं। वे मां से अनुनय विनय करते हैं कि वे ही उन्हें इस भवसागर से पार करा सकती है वह कहते हैं कि है मां मेरा उद्धार तभी होगा जब आप श्रीराम से मेरे लिए अनुनय विनय करके मेरा उद्धार करवाओगी। उन्हें श्रीराम पर अटूट श्रद्धा तथा विश्वास है।

Navodaya Vidyalaya Class 6 Result 2023 Out : नवोदय विद्यालय क्लास 6 रिजल्ट जारी हुआ

Navodaya Vidyalaya Class 6 Result 2023 Out

यदि आप भी नवोदय विद्यालय क्लास में एडमिशन के लिए 29 अप्रैल 2023 को परीक्षा देकर आए हैं और अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहा है कि मेरा रिजल्ट किस दिन आने वाला है रिजल्ट कैसे देखना है तो इस पोस्ट में पूरी जानकारी बताया गया है आपको बता दें कि नवोदय विद्यालय का रिजल्ट आज ही जारी कर दिया गया है और आप आज ही अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं बिना कोई परेशानी है तो चलिए इस पोस्ट को शुरू से लेकर अंत तक पर है आप अपने रिजल्ट आसानी से देख सकेंगे क्योंकि नवोदय विद्यालय क्लास 6 का रिजल्ट अभी अभी तुरंत जारी कर दिया गया है और इस पोस्ट के माध्यम से आप अपना रिजल्ट देख सकते हैं 

Navodaya Vidyalaya Class 6 Result 2023 Out – Full Overview 

Name Of Title Navodaya Vidyalaya Class 6 Result 2023
Jnv Exam Date 29 April 2023
Name of Organizers Jawahar Navodaya Vidyalaya Samiti
Admission in Class 6th Class(Class VI)
Name of Exam 2023 Jnvst 2023
Result Date  Today

Navodaya Vidyalaya Class 6 Result 2023 Today Out

नवोदय विद्यालय क्लास 6 में एडमिशन के लिए लाखों परीक्षार्थी परीक्षा दिए थे और उनका इंतजार आज समाप्त हुआ क्योंकि नवोदय विद्यालय के तरफ से रिजल्ट को आज जारी कर दिया गया है इस पोस्ट के माध्यम से आप अपना रिजल्ट आसानी से चेक कर सकते हैं तो कैसे अपना रिजल्ट चेक करना है पूरी जानकारी इस पोस्ट में स्टेप बाय स्टेप बताई गई है बहुत दिनों के बाद नवोदय विद्यालय क्लास का रिजल्ट आज जारी किया है और इस पोस्ट में रिजल्ट चेक करने करने का लिंक आप लोगों को मिल जाएगा 

Navodaya Vidyalaya Class 6 Result 2023 Kaise Dekhen ?

जवाहर नवोदय विद्यालय क्लास 6 का रिजल्ट चेक करने का लिंक नीचे देने के लिए दिया गया है जैसे ही आप लोग नीचे लिंक पर क्लिक कीजिएगा तो आपके सामने नवोदय विद्यालय के ऑफिशियल साइट खुल जाएगा जिसमें आप लोगों से और रोल नंबर मांगेगा और डेट ऑफ बर्थ मांगेगा जैसी आप उसमें भरकर सर्च रिजल्ट पर क्लिक कीजिएगा वैसे ही आप का रिजल्ट आपके सामने खुल जाएगा तो कुछ इस प्रकार से आप अपना नवोदय विद्यालय क्लास 6 का रिजल्ट आसानी से चेक कर सकते हैं 

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Class 12th Hindi Top 10 Subjective Questions Answers : Most Important Questions Answers

1. लेखक को अब तिरिछ का सपना नहीं आता क्यों ?

उत्तर- लेखक उदय प्रकाश को अब तिरिछ का सपना नहीं आने का कारण लेखक को सपना सत्य प्रतीत होना था। परंतु अब लेखक विश्वास करता है कि यह सब सपना है अभी आप खोलते ही सब ठीक हो जाएगा।

इससे पहले लेखक को सपने की बात प्रचलित विश्वास सपने सच हुआ करते सत्य प्रतीत होती थी। लेखक फैंटेसी में जीता था परंतु अनुभव से यह जान गया कि सपना बस सपना भर है। लेखक ने जटिल यथार्थ को सफलतापूर्वक अभिव्यक्त करने के लिए दुःस्वपन का प्रयोग किया है। परंतु जैसे ही लेखक का भ्रम टूटता है तो उसे डर नहीं लगता और तिरिछ के सपने नहीं आते।

2. जहां भय है वहां मेघा नहीं हो सकती क्यों ?

उत्तर- हम जानते हैं कि बचपन से ही हमारे लिए ऐसे वातावरण में रहना अत्यंत आवश्यक है। जो स्वतंत्रतापूर्ण हो। हममें से अधिकांश व्यक्ति ज्यों-ज्यों बड़े होते जाते हैं त्यों-त्यों ज्यादा भयभीत होते जाते हैं। हम जीवन से भयभीत रहते हैं नौकरी के छूटने से परंपराओं से और इस बात से भी करते हैं कि पड़ोसी या पत्नी या पति क्या कहेंगे हम मृत्यु से भयभीत रहते हैं। हममें से अधिकांश व्यक्ति किसी न किसी रूप में भयभीत है और जहां भय हैं वहां मेघा नहीं है

3. नूतन विश्व का निर्माण कैसे हो सकता है ?

उत्तर- आज संपूर्ण विश्व में महत्वकांक्षी तथा प्रतिस्पर्धा के कारण अराजकता फैली हुई है। विश्व के सभी देश पतन की ओर अग्रसर है। इसे रोकना मानव समाज के लिए एक चुनौती है इस चुनौती का प्रत्युत्तर पूर्णतया से तभी दिया जा सकता है जब हम अभय हो हम एक हिंदू या एक साम्यवादी या एक पूंजीवादी की भांति न सोचे अपितु एक समग्र मानव की भांति इस समस्या का हल खोजने का प्रयत्न करें और इस समस्या का हल तब तक नहीं खोज सकते हैं जब तक कि हम स्वयं संपूर्ण समाज के खिलाफ क्रांति नहीं करते इस महत्वाकांक्षा के खिलाफ विद्रोह नहीं करते जिस पर संपूर्ण मानव समाज आधारित है जब हम स्वयं महत्वकांक्षी न हो। परिग्रही हो एवं अपनी ही सुरक्षा से न चिपके हो तभी हम इस चुनौती का प्रत्युत्तर दे सकेंगे। तभी हम नूतन विश्व का निर्माण कर सकेंगे।

4. कवि ने अपनी एक आंख की तुलना दर्पण से क्यों की है ?

उत्तर- कवि ने अपनी एक आंख की तुलना दर्पण से इसलिए की है क्योंकि दर्पण स्वच्छ व निर्मल होता है। उसमें मनुष्य की वैसी ही प्रति छाया दिखती है जैसा वह वास्तव में होता है कवि स्वयं को दर्पण के सामने स्वच्छ व निर्मल भावों से ओत-प्रोत मानता है उसके हृदय में जरा सा भी कृत्रिमता नहीं है उसके इन निर्मल भावों के कारण ही बड़े-बड़े रूपवान लोग उसके चरण पकड़ कर लालसा के साथ उसके मुख की ओर निहारते हैं।

5. गायें किस ओर दौड़ पड़ी ?

उत्तर- भोर हो गयी है दुलार भरे कोमल मधुर स्वर में सोए हुए बालक कृष्ण को भोर होने का संकेत देते हुए जगाया जा रहा है। प्रथम पद में भोर होने के संकेत दिए गए हैं कमल के फूल खिल उठे हैं पक्षीगण शोर मचा रहे हैं गायें अपने गौशालाओं से अपने अपने बछड़ों की ओर दूध हेतु दौड़ पड़ी।

6. कृष्ण खाते समय क्या-क्या करते हैं ?

उत्तर- बालक कृष्ण अपने बाल सुलभ व्यवहार से सबका मन मोह लेते हैं। भोजन करते समय कृष्ण कुछ खाते हैं तथा कुछ धरती पर गिरा देते हैं उन्हें मना मना कर खिलाया जा रहा है। यशोदा माता यह सब देख कर पुलकित हो रही है। विविध प्रकार की भोजन जैसे बड़ी, बेसन का बड़ा आदि अनगिनत प्रकार के व्यंजन है।

बालक कृष्ण अपने हाथों में ले लेते हैं कुछ खाते हैं तथा जितनी इच्छा करती है उतना खाते हैं जो स्वादिष्ट लगती है उसे ग्रहण करते हैं दोनों में रखी दही में विशेष रूचि लेते हैं मिश्री मिलती दही तथा मक्खन को मुंह में डालते हुए उनकी शोभा का वर्णन नहीं किया जा सकता इस प्रकार कृष्ण खाते समय अपनी लीला से सबका मन मोह लेते हैं।

7. तुलसीदास जी सीता से कैसी सहायता मांगते हैं ?

उत्तर- तुलसीदास मां सीता से भवसागर पार कराने वाले श्री राम को गुणगान करते हुए मुक्ति प्राप्ति की सहायता की याचना करते हैं। हे जगत की जननी अपने वचन द्वारा मेरी सहायता कीजिए।

8. तुलसीदास सीधे राम से न कहकर सीता से क्यों कहलवाना चाहते हैं ?

उत्तर- ऐसा संभवतः तुलसीदास इसलिए चाहते थे क्योंकि

1. उनको अपनी बातें स्वयं राम के समक्ष रखने का साहस नहीं हो रहा होगा वह संकोच का अनुभव कर रहे होंगे।

2. सीताजी सशक्त ढंग से उनकी बातों को भगवान श्री राम के समक्ष रख सकेगी ऐसा प्रायः देखा जाता है कि किसी व्यक्ति से उनकी पत्नी के माध्यम से कार्य करवाना अधिक आसान होता है।

3. तुलसी ने सीताजी को मां माना है तथा पूरे रामचरितमानस में अनेकों बार मां कहकर ही संबोधित किया है अतः माता सीता द्वारा अपनी बातें राम के समक्ष रखना ही उन्होंने श्रेयस्कर समझा।

9. तुलसी के हृदय में किसका डर है?

उत्तर- तुलसी की दयनीय अवस्था में उनके सगे संबंधियों आदि किसी ने भी उनकी सहायता नहीं की उनके हृदय में इसका संताप था इससे मुक्ति पाने के लिए उन्हें संतों की शरण में जाना पड़ा और उन्हें वहां इसका आश्वासन भी मिला कि श्री राम की शरण में जाने से सब संकट दूर हो जाते हैं।

10. कबीर ने भक्ति को कितना महत्व दिया ?

उत्तर- कबीर ने अपनी सबदी साख और रमैनी द्वारा धर्म की सटीक व्याख्या प्रस्तुत की लोक जगत में पर्याप्त पाखंड व्यभिचार मूर्ति पूजा और जाति पाति छुआछूत का प्रबल विरोध किया उन्होंने योग यज्ञ व्रत दान और भजन की सही व्याख्या कर उसके समक्ष उपस्थित किया।

कवि ने भक्ति में पाखंडवादी विचारों की जमकर खिल्लियां उड़ाई और मानव मानव के बीच समन्वयवादी संस्कृति की स्थापना की लोगों के बीच भक्ति के सही स्वरूप की व्याख्या की भक्ति की पवित्र धारा को बहाने उसे अनवरत गतिमय रहने में कबीर ने अपने प्रखर विचारों से उसे बल दिया उन्होंने विधर्मियों की आलोचना की भक्ति विमुख लोगों द्वारा भक्ति की परिभाषा गढ़ने तीव्र आलोचना की भक्ति के सत्य स्वरूप का उन्होंने उद्घाटन किया और जन-जन के बीच एकता भाईचारा प्रेम की अजस्र गंगा बहायी। वह निर्गुण विचारधारा के तेजस्वी कवि थे उन्होंने ईश्वर के निर्गुण स्वरूप का चित्रण किया उसकी सही व्याख्या की सत्य स्वरूप का सबको दर्शन कराया।

Class 12th Hindi Top 5 VVI Subjective Question Answer 2023

Class 12th Hindi Top 5 VVI Subjective Question Answer 2023

1. गांधीजी के शिक्षा संबंधी आदर्श क्या थे ?

उत्तर- गांधीजी शिक्षा का मतलब सुसंस्कृत बनाने और निष्कलुष चरित्र निर्माण समझते थे। अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आचार्य पंक्ति के समर्थक थे अर्थात बच्चे सुसंस्कृत और निष्कलुष चरित्र वाले व्यक्तियों के सान्निध्य से ज्ञान प्राप्त करें। अक्षर ज्ञान को वे इस उद्देश्य की प्राप्ति में विधेय मात्र मानते थे।

वर्तमान शिक्षा पद्धति को वे खौफनाक और हेय मानते थे क्योंकि शिक्षा का मतलब है बौद्धिक और चारित्रिक विकास लेकिन यह पद्धति उसे कुंठित करती है। इस पद्धति में बच्चों को पुस्तक रटाया जाता है ताकि आगे चलकर वह क्लर्क का काम कर सके, उनका सर्वागीण विकास से कोई सरोकार नहीं है।

गांधीजी जीविका के लिए नये साधन सीखने के इच्छुक बच्चों के लिए औद्योगिक शिक्षा के पक्षधर थे। तात्पर्य नहीं था कि हमारी परंपरागत व्यवसाय में खोट है वरन् यह कि हम ज्ञान प्राप्त कर उसका उपयोग अपने पेशे और जीवन को परिष्कृत करने में करें।

2. चंपारण में शिक्षा की व्यवस्था के लिए गांधी जी ने क्या किया ?

उत्तर- चंपारण में शिक्षा की व्यवस्था के लिए गांधी जी ने अनेकों काम किए। उनका विचार था कि ग्रामीण बच्चों की शिक्षाकी व्यवस्था किए बिना केवल आर्थिक समस्याओं को समझाने से काम नहीं चलेगा इसके लिए उन्होंने तीरथ गांव में आश्रम विद्यालय स्थापित किया बड़हरवा मधुबन और भितिहरवा । कुछ निष्ठावान कार्यकर्ताओं को तीनों गांवों में तैनात किया बड़हरवा के विद्यालय में श्री बवन जी गोखले और उनकी पत्नी विदुषी अवंतिकाबाई गोखले ने चलाया। मधुबन में नरहरिदास पारिख और उनकी पत्नी कस्तूरबा तथा अपने सेक्रेटरी श्री महादेव देसाई को नियुक्त किया। भितिहरवा मैं वयोवृद्ध डॉक्टर देव और सोपन जी ने चलाया। बाद में पुंडारिक जी गए स्वयं कस्तूरबा विद्यालय आश्रम में रही और इन कर्मठ और विद्वान स्वयंसेवकों की देखभाल की।

3. हिंदी की आधुनिक कविता की क्या विशेषताएं आलोचक ने बताई है ?

उत्तर- हिंदी की आधुनिक कविता में नई प्रगीतात्मकता का उभार देखता है। वह देखता है आज के कवि को न तो अपने अंदर झांक कर देखने में संकोच है न बाहर के यथार्थ का सामना करने में हिचक अंदर न तो किसी और संदिग्ध विश्व दृष्टि का मजबूत खूंटा गाड़ने की जिद है और न बाहर की व्यवस्था को एक विराट पहाड़ के रूप में आंकने की हवस बाहर छोटी से छोटी घटना स्थिति वस्तु आदि पर नजर है और कोशिश है उसे अर्थ देने की इसी प्रकार बाहर की प्रतिक्रिया स्वरूप अंदर उठने वाली छोटी से छोटी लहर को भी पकड़ कर उसे शब्दों में बांध लेने का उत्साह है। एक नए स्तर पर कभी व्यक्तित्व अपने और समाज के बीच के रिश्ते को साधने की कोशिश कर रहा है और इस प्रक्रिया में जो व्यक्तित्व बनता दिखाई दे रहा है वह निश्चय ही नए ढंग की प्रगीतात्मकता के उभार का संकेत है।

4. कुंती का परिचय आप किस तरह देंगे ?

उत्तर- कुंती सिपाही की मां शीर्षक एकांकी में एक प्रमुख पात्र है यह एक अच्छी पड़ोसन के रूप में रंगमंच पर प्रस्तुत हुई है यद्यपि कुंती की भूमिका थोड़े समय के लिए है तब भी उसे थोड़े में आंका नहीं जा सकता वह बिशनी की पुत्री मुन्नी के विवाह के लिए चिंतित है। वह स्वयं मुन्नी के लिए वर घर खोजने को भी तैयार है वह बिशनी को सांत्वना भी देती है। बिशनीके पुत्र मानक के वर्मा की सकुशल लौटने की बात भी हुआ करती है। बिशनी के प्रति उसकी सहानुभूति उसके शब्दों में स्पष्ट दिखाई पड़ती है वह कहती है तू इस तरह दिल क्यों हल्का कर रही है कुंती वर्मा के लड़कियों के प्रति थोड़ा कठोर दिखाई देती है उनके हाव-भाव एवं पहनावे तथा भिक्षाटन पर थोड़ा क्रुद्ध भी हो जाती है। उनका इस तरह से भिक्षा मांगना कतई अच्छा नहीं लगता है। यह कहती भी है- हाय रे राम ! यह लड़कियां की……|

5. तिरिछ क्या है कहानी में यह किसका प्रतीक है ?

उत्तर- तिरिछ एक बेहद जहरीला जीव है। जिसके काटने से व्यक्ति का बचना नामुमकिन हो जाता है। यह जैसे ही आदमी को काटता है वैसे ही वहां से भाग कर किसी जगह पेशाब करता है और उस पेशाब में लेट जाता है अगर कुछ ऐसा कर दे तो आदमी बच नहीं सकता वही तिरिछ काटने के लिए तभी दौड़ता है जब उसे नजर टकरा जाए कहानी में तिरिछ का प्रतीक है। जिस भीषण यथार्थ के शिकार बाबूजी बनते हैं बेटे के सपने में तिरिछ बनकर प्रकट होता है।

Navodaya Result 2023 Class 6th : आ गया नवोदय का रिजल्ट देखें यहां से अपडेट

Navodaya Result 2023 Class 6th

यदि आप भी नवोदय विद्यालय क्लास 6 में एडमिशन के लिए नवोदय विद्यालय में परीक्षा दिए हैं और अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहा है कि नवोदय विद्यालय क्लास 6 का रिजल्ट कब आएगा और नवोदय विद्यालय का रिजल्ट कैसे देखना है इस बार कट ऑफ कितना रहने वाला है कैसे एडमिशन होगा पूरी जानकारी है स्टेप बाय स्टेप इस पोस्ट में बताया गया है पूरी जानकारी को जानने के लिए इस पोस्ट को शुरू से लेकर अंत तक पढ़िए

Navodaya Result 2023 Class 6th – Full Overview 

Name Of Title Navodaya Vidyalaya Class 6 Result 2023
Jnv Exam Date 29 April 2023
Name of Organizers Jawahar Navodaya Vidyalaya Samiti
Admission in Class 6th Class(Class VI)
Name of Exam 2023 Jnvst 2023
Session For Admission 2023 – 2024

Navodaya Result 2023 Class 6th Kab Aayega

नवोदय विद्यालय क्लास 6 की परीक्षा 29 अप्रैल 2023 को हुई थी आप लाखों परीक्षार्थी का रिजल्ट का इंतजार है की रिजल्ट किस दिन आने वाला है तो चलिए इस आर्टिकल के माध्यम से हम आप लोगों को बताने वाले हैं कि नवोदय विद्यालय समिति क्लास 6 का रिजल्ट कब जारी करने वाली है और आप रिजल्ट कैसे देख सकते हैं देखिए रिजल्ट की बात करें तो नवोदय विद्यालय क्लास का रिजल्ट इसी महीने के लास्ट तक आने की पूरी पूरी संभावना है नवोदय विद्यालय क्लास 6 का रिजल्ट जून माह के तीसरे सप्ताह में आने की संभावना बताई जा रही है अगर आप का रिजल्ट जून माह में नवोदय विद्यालय के तरफ से जारी नहीं किया जाता है तो जुलाई के फर्स्ट सप्ताह में नवोदय विद्यालय समिति क्लास 6 का रिजल्ट जारी कर सकती है वैसे आप लोगों को बता देगी पिछले वर्ष 2022 में नवोदय विद्यालय क्लास 6 का रिजल्ट 8 जुलाई को जारी की थी और इस बार भी जुलाई में रिजल्ट आने की संभावना है जवाहर नवोदय विद्यालय में पूरे देश भर के बच्चे क्लास 6 में एडमिशन के लिए परीक्षा दिए हैं जैसा कि सभी छात्र-छात्राओं को पता है कि पूरे देश भर के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग क्षेत्रों से बच्चे नवोदय विद्यालय क्लास 6 की परीक्षा में शामिल हुए थे 

Navodaya Result 2023 Class 6th Result Kaise Dekhen ?

जवाहर नवोदय विद्यालय क्लास 6 का रिजल्ट चेक करने के लिए नीचे पूरी जानकारी स्टेप बाय स्टेप बताई गई है जिसे पढ़कर आप नवोदय विद्यालय क्लास 6 का रिजल्ट आसानी से देख सकते हैं चलिए आपको बता देते हैं कि रिजल्ट कैसे चेक करना है रिजल्ट चेक करने का लिंक नीचे दे दिया गया है जैसे आप लिंक पर क्लिक कीजिएगा तो आपके सामने नवोदय विद्यालय की ऑफिशियल वेबसाइट खुल जाएगी और जैसी नवोदय विद्यालय का ऑफिशियल साइट आपके सामने खुल जाती है तो उसमें आपसे आपकी डिटेल मांगी जाएगी तो आप अपना डिटेल भरकर जैसे ही व्यू रिजल्ट के ऑप्शन पर क्लिक कीजिएगा वैसे ही आप का रिजल्ट आपके सामने कोई खुल कर आ जाएगा तो कुछ इस प्रकार से आप अपना नवोदय विद्यालय क्लास 6 का रिजल्ट आसानी पूर्वक देख सकते हैं 

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Navodaya Result 2023 Class 6th Download 
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Note – 

नवोदय विद्यालय समिति के तरफ से अभी तक क्लास 6 का रिजल्ट जारी नहीं किया गया है जब नवोदय विद्यालय की तरफ से रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा तो इस आर्टिकल के माध्यम से आप अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं आप लोगों को रिजल्ट चेक करने का लिंक ऊपर दे दिया गया है जहां से कि लिंक पर क्लिक करके रिजल्ट चेक कर सकते हैं

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कड़बक(kadbak) Subjective Question Answer of Hindi(100Marks) 12th Class | Kadbak Ques Ans Bihar Board

1. कवि ने अपनी एक आंख की तुलना दर्पण से क्यों की है ?

उत्तर- कवि ने अपनी एक आंख की तुलना दर्पण से इसलिए की है क्योंकि दर्पण स्वच्छ व निर्मल होता है। उसमें मनुष्य की वैसी ही प्रति छाया दिखती है जैसा वह वास्तव में होता है कवि स्वयं को दर्पण के सामने स्वच्छ व निर्मल भावों से ओत-प्रोत मानता है उसके हृदय में जरा सा भी कृत्रिमता नहीं है उसके इन निर्मल भावों के कारण ही बड़े-बड़े रूपवान लोग उसके चरण पकड़ कर लालसा के साथ उसके मुख की ओर निहारते हैं।

2. कवि ने किस रूप में स्वयं को याद रखे जाने की इच्छा व्यक्त की है उनकी इस इच्छा का मर्म बताएं

उत्तर- कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने अपने स्मृति के रक्षार्थ जो इच्छा प्रकट की है उसका वर्णन अपने कविताओं में किया है। कवि का कहना है कि मैंने जान-बूझकर संगीतमय काव्य की रचना की है ताकि इस प्रबंध के रूप में संसार में मेरी स्मृति बरकरार रहे। इस काव्य कृति में वर्णित प्रगाढ़ प्रेम सर्वथा नयनों की अश्रुधारा से सिंचित है यानी कठिन विरह प्रधान काव्य है।

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3. भाव स्पष्ट करें-

1. जौं लहि अंबहि डांभ न होई तौ लहि सुगंध बसाई न सोई ।

प्रस्तुत पंक्तियां प्रथम कड़बक से उद्धत की गई है। इस कविता के रचयिता मलिक मुहम्मद जायसी है। इन पंक्तियों के द्वारा कवि ने अपने विचारों को प्रकट करने का काम किया है। जिस प्रकार आम में नुकीली डार्भे नहीं निकलती तब तक उसमें सुगंध नहीं आता यानी आम में सुगंध आने के लिए डाभ युक्त मंजरियों का निकलना जरूरी है। डाभ के कारण आम की खुशबू बढ़ जाती है ठीक उसी प्रकार गुण के बल पर व्यक्ति समाज में आदर्श पाने का हकदार बन जाता है इसकी गुणवत्ता उसके व्यक्तित्व में निखार ला देती है।

काव्य शास्त्रीय प्रयोग की दृष्टि से यहां पर अत्यंत तिरस्कृत वाक्यगत वाच्य ध्वनि है। यह ध्वनि प्रयोजनवती लक्षण का आधार लेकर खड़ी होती है। इसमें वाच्यार्थ का सर्वथा त्याग रहता है और एक दूसरा ही अर्थ निकलता है।

इन पंक्तियों का दूसरा विशेष अर्थ है कि जब तक पुरुष में दोष नहीं होता तब तक उसमें गरिमा नहीं आती है। डाभ-मंजरी आने से पहले आम के वृक्ष में नुकीले टोंसे निकल आते हैं।

2. रकत कै लेई का क्या अर्थ है ?

उत्तर- कविवर जायसी कहते हैं कि कवि मुहम्मद में अर्थात मैंने यह काव्य रचकर सुनाया है। इस काव्य को जिसने भी सुना है उसी को प्रेम की पीड़ा का अनुभव हुआ है मैंने इस कथा को रक्त रूपी लेई के द्वारा जोड़ा है और इसकी गाढ़ी प्रीति को आंसुओं से भिगोया है। यही सोचकर मैंने इस ग्रंथ का निर्माण किया है कि जगत में कदाचित मेरी यही निशानी है शेष बची रह जाएगी।

3. मुहम्मद यहि कबि जोरि सुनावा यहां कवि ने जोरि शब्द का प्रयोग किस अर्थ में किया है ?

उत्तर- मुहम्मद यहि कबि जोरि सुनावा में जोरि शब्द का प्रयोग कवि ने रचकर अर्थ में किया है अर्थात मैंने यह काव्य रचकर सुनाया है कवि यह कहकर इस तथ्य को उजागर करना चाहता है कि मैंने रत्नसेन पद्मावती आदि जिन पात्रों को लेकर अपने ग्रंथ की रचना की है उनका वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं था अपितु उनकी कहानी मात्र प्रचलित रही है।

4. दूसरे कड़बक का भाव सौंदर्य स्पष्ट करें ?

उत्तर- दूसरे कड़बक मैं कवि ने इस तथ्य को उजागर किया है कि उसने रत्नसेन पद्मावती आदि जिन पात्रों को लेकर अपने ग्रंथ की रचना की है उनका वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं था अपितु उनकी कहानी मात्र प्रचलित रही परंतु इस काव्य को जिसने भी सुना है उसी को प्रेम की पीड़ा का अनुभव हुआ है कवि ने इस कथा को रक्त रूपी लेई के द्वारा जोड़ा है और इसकी गाढ़ी प्रीति को आंसुओं से भिगोया है कवि ने इस काव्य की रचना इसलिए की क्योंकि जगत में उसकी यही निशानी शेष बची रह जाएगी कवि यह चाहता है कि इस कथा को पढ़कर उसे भी याद कर लिया जाए।

5. व्याख्या करें –

धनि सो पुरुख जस कीरति जासू ।

फूल मेरे पे मरै न बासू ।।

उत्तर- प्रस्तुत पंक्तियां जायसी लिखित कड़बक के द्वितीय भाग से उद्धत की गई है। पंक्तियों में कवि का कहना है कि जिस प्रकार पुष्प अपने नश्वर शरीर का त्याग कर देता है किंतु उसकी सुगंधित धरती पर परिव्याप्त रहती है ठीक उसी प्रकार महान व्यक्ति भी इस धाम पर अवतरित होकर अपनी कीर्ति पताका सदा के लिए इस भुवन मैं फहरा जाते हैं। पुष्प सुगंध सदृश्य यशस्वी लोगों की भी कीर्तियां विनष्ट नहीं होती बल्कि युग युगांतर उनकी लोक हितकारी भावनाएं जन जन के कंठ में विराजमान रहती है।

दूसरे अर्थ में पद्मावती के लोग की कथा को अध्यात्मिक धरातल पर स्थापित करते हुए कवि ने सूफी साधना के मूल मंत्रों को जन जन तक पहुंचाने का कार्य किया है इस संसार की नश्वरता की चर्चा अलौकिक कथा काव्य द्वारा प्रस्तुत कर कवि ने अलौकिक जगत से सब को रूबरू कराने का काम किया है यह जगह तो नश्वर है केवल कीर्तियां ही अमर रह जाती है। लौकिक जीवन में अमरता प्राप्ति के लिए अलौकिक कर्म द्वारा ही मानव उस सत्ता को प्राप्त कर सकता है।

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