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Class 12th Hindi Top 10 Subjective Questions Answers : Most Important Questions Answers

1. लेखक को अब तिरिछ का सपना नहीं आता क्यों ?

उत्तर- लेखक उदय प्रकाश को अब तिरिछ का सपना नहीं आने का कारण लेखक को सपना सत्य प्रतीत होना था। परंतु अब लेखक विश्वास करता है कि यह सब सपना है अभी आप खोलते ही सब ठीक हो जाएगा।

इससे पहले लेखक को सपने की बात प्रचलित विश्वास सपने सच हुआ करते सत्य प्रतीत होती थी। लेखक फैंटेसी में जीता था परंतु अनुभव से यह जान गया कि सपना बस सपना भर है। लेखक ने जटिल यथार्थ को सफलतापूर्वक अभिव्यक्त करने के लिए दुःस्वपन का प्रयोग किया है। परंतु जैसे ही लेखक का भ्रम टूटता है तो उसे डर नहीं लगता और तिरिछ के सपने नहीं आते।

2. जहां भय है वहां मेघा नहीं हो सकती क्यों ?

उत्तर- हम जानते हैं कि बचपन से ही हमारे लिए ऐसे वातावरण में रहना अत्यंत आवश्यक है। जो स्वतंत्रतापूर्ण हो। हममें से अधिकांश व्यक्ति ज्यों-ज्यों बड़े होते जाते हैं त्यों-त्यों ज्यादा भयभीत होते जाते हैं। हम जीवन से भयभीत रहते हैं नौकरी के छूटने से परंपराओं से और इस बात से भी करते हैं कि पड़ोसी या पत्नी या पति क्या कहेंगे हम मृत्यु से भयभीत रहते हैं। हममें से अधिकांश व्यक्ति किसी न किसी रूप में भयभीत है और जहां भय हैं वहां मेघा नहीं है

3. नूतन विश्व का निर्माण कैसे हो सकता है ?

उत्तर- आज संपूर्ण विश्व में महत्वकांक्षी तथा प्रतिस्पर्धा के कारण अराजकता फैली हुई है। विश्व के सभी देश पतन की ओर अग्रसर है। इसे रोकना मानव समाज के लिए एक चुनौती है इस चुनौती का प्रत्युत्तर पूर्णतया से तभी दिया जा सकता है जब हम अभय हो हम एक हिंदू या एक साम्यवादी या एक पूंजीवादी की भांति न सोचे अपितु एक समग्र मानव की भांति इस समस्या का हल खोजने का प्रयत्न करें और इस समस्या का हल तब तक नहीं खोज सकते हैं जब तक कि हम स्वयं संपूर्ण समाज के खिलाफ क्रांति नहीं करते इस महत्वाकांक्षा के खिलाफ विद्रोह नहीं करते जिस पर संपूर्ण मानव समाज आधारित है जब हम स्वयं महत्वकांक्षी न हो। परिग्रही हो एवं अपनी ही सुरक्षा से न चिपके हो तभी हम इस चुनौती का प्रत्युत्तर दे सकेंगे। तभी हम नूतन विश्व का निर्माण कर सकेंगे।

4. कवि ने अपनी एक आंख की तुलना दर्पण से क्यों की है ?

उत्तर- कवि ने अपनी एक आंख की तुलना दर्पण से इसलिए की है क्योंकि दर्पण स्वच्छ व निर्मल होता है। उसमें मनुष्य की वैसी ही प्रति छाया दिखती है जैसा वह वास्तव में होता है कवि स्वयं को दर्पण के सामने स्वच्छ व निर्मल भावों से ओत-प्रोत मानता है उसके हृदय में जरा सा भी कृत्रिमता नहीं है उसके इन निर्मल भावों के कारण ही बड़े-बड़े रूपवान लोग उसके चरण पकड़ कर लालसा के साथ उसके मुख की ओर निहारते हैं।

5. गायें किस ओर दौड़ पड़ी ?

उत्तर- भोर हो गयी है दुलार भरे कोमल मधुर स्वर में सोए हुए बालक कृष्ण को भोर होने का संकेत देते हुए जगाया जा रहा है। प्रथम पद में भोर होने के संकेत दिए गए हैं कमल के फूल खिल उठे हैं पक्षीगण शोर मचा रहे हैं गायें अपने गौशालाओं से अपने अपने बछड़ों की ओर दूध हेतु दौड़ पड़ी।

6. कृष्ण खाते समय क्या-क्या करते हैं ?

उत्तर- बालक कृष्ण अपने बाल सुलभ व्यवहार से सबका मन मोह लेते हैं। भोजन करते समय कृष्ण कुछ खाते हैं तथा कुछ धरती पर गिरा देते हैं उन्हें मना मना कर खिलाया जा रहा है। यशोदा माता यह सब देख कर पुलकित हो रही है। विविध प्रकार की भोजन जैसे बड़ी, बेसन का बड़ा आदि अनगिनत प्रकार के व्यंजन है।

बालक कृष्ण अपने हाथों में ले लेते हैं कुछ खाते हैं तथा जितनी इच्छा करती है उतना खाते हैं जो स्वादिष्ट लगती है उसे ग्रहण करते हैं दोनों में रखी दही में विशेष रूचि लेते हैं मिश्री मिलती दही तथा मक्खन को मुंह में डालते हुए उनकी शोभा का वर्णन नहीं किया जा सकता इस प्रकार कृष्ण खाते समय अपनी लीला से सबका मन मोह लेते हैं।

7. तुलसीदास जी सीता से कैसी सहायता मांगते हैं ?

उत्तर- तुलसीदास मां सीता से भवसागर पार कराने वाले श्री राम को गुणगान करते हुए मुक्ति प्राप्ति की सहायता की याचना करते हैं। हे जगत की जननी अपने वचन द्वारा मेरी सहायता कीजिए।

8. तुलसीदास सीधे राम से न कहकर सीता से क्यों कहलवाना चाहते हैं ?

उत्तर- ऐसा संभवतः तुलसीदास इसलिए चाहते थे क्योंकि

1. उनको अपनी बातें स्वयं राम के समक्ष रखने का साहस नहीं हो रहा होगा वह संकोच का अनुभव कर रहे होंगे।

2. सीताजी सशक्त ढंग से उनकी बातों को भगवान श्री राम के समक्ष रख सकेगी ऐसा प्रायः देखा जाता है कि किसी व्यक्ति से उनकी पत्नी के माध्यम से कार्य करवाना अधिक आसान होता है।

3. तुलसी ने सीताजी को मां माना है तथा पूरे रामचरितमानस में अनेकों बार मां कहकर ही संबोधित किया है अतः माता सीता द्वारा अपनी बातें राम के समक्ष रखना ही उन्होंने श्रेयस्कर समझा।

9. तुलसी के हृदय में किसका डर है?

उत्तर- तुलसी की दयनीय अवस्था में उनके सगे संबंधियों आदि किसी ने भी उनकी सहायता नहीं की उनके हृदय में इसका संताप था इससे मुक्ति पाने के लिए उन्हें संतों की शरण में जाना पड़ा और उन्हें वहां इसका आश्वासन भी मिला कि श्री राम की शरण में जाने से सब संकट दूर हो जाते हैं।

10. कबीर ने भक्ति को कितना महत्व दिया ?

उत्तर- कबीर ने अपनी सबदी साख और रमैनी द्वारा धर्म की सटीक व्याख्या प्रस्तुत की लोक जगत में पर्याप्त पाखंड व्यभिचार मूर्ति पूजा और जाति पाति छुआछूत का प्रबल विरोध किया उन्होंने योग यज्ञ व्रत दान और भजन की सही व्याख्या कर उसके समक्ष उपस्थित किया।

कवि ने भक्ति में पाखंडवादी विचारों की जमकर खिल्लियां उड़ाई और मानव मानव के बीच समन्वयवादी संस्कृति की स्थापना की लोगों के बीच भक्ति के सही स्वरूप की व्याख्या की भक्ति की पवित्र धारा को बहाने उसे अनवरत गतिमय रहने में कबीर ने अपने प्रखर विचारों से उसे बल दिया उन्होंने विधर्मियों की आलोचना की भक्ति विमुख लोगों द्वारा भक्ति की परिभाषा गढ़ने तीव्र आलोचना की भक्ति के सत्य स्वरूप का उन्होंने उद्घाटन किया और जन-जन के बीच एकता भाईचारा प्रेम की अजस्र गंगा बहायी। वह निर्गुण विचारधारा के तेजस्वी कवि थे उन्होंने ईश्वर के निर्गुण स्वरूप का चित्रण किया उसकी सही व्याख्या की सत्य स्वरूप का सबको दर्शन कराया।

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