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Class 12th Hindi Top 5 VVI Subjective Question Answer 2023

Class 12th Hindi Top 5 VVI Subjective Question Answer 2023

1. गांधीजी के शिक्षा संबंधी आदर्श क्या थे ?

उत्तर- गांधीजी शिक्षा का मतलब सुसंस्कृत बनाने और निष्कलुष चरित्र निर्माण समझते थे। अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आचार्य पंक्ति के समर्थक थे अर्थात बच्चे सुसंस्कृत और निष्कलुष चरित्र वाले व्यक्तियों के सान्निध्य से ज्ञान प्राप्त करें। अक्षर ज्ञान को वे इस उद्देश्य की प्राप्ति में विधेय मात्र मानते थे।

वर्तमान शिक्षा पद्धति को वे खौफनाक और हेय मानते थे क्योंकि शिक्षा का मतलब है बौद्धिक और चारित्रिक विकास लेकिन यह पद्धति उसे कुंठित करती है। इस पद्धति में बच्चों को पुस्तक रटाया जाता है ताकि आगे चलकर वह क्लर्क का काम कर सके, उनका सर्वागीण विकास से कोई सरोकार नहीं है।

गांधीजी जीविका के लिए नये साधन सीखने के इच्छुक बच्चों के लिए औद्योगिक शिक्षा के पक्षधर थे। तात्पर्य नहीं था कि हमारी परंपरागत व्यवसाय में खोट है वरन् यह कि हम ज्ञान प्राप्त कर उसका उपयोग अपने पेशे और जीवन को परिष्कृत करने में करें।

2. चंपारण में शिक्षा की व्यवस्था के लिए गांधी जी ने क्या किया ?

उत्तर- चंपारण में शिक्षा की व्यवस्था के लिए गांधी जी ने अनेकों काम किए। उनका विचार था कि ग्रामीण बच्चों की शिक्षाकी व्यवस्था किए बिना केवल आर्थिक समस्याओं को समझाने से काम नहीं चलेगा इसके लिए उन्होंने तीरथ गांव में आश्रम विद्यालय स्थापित किया बड़हरवा मधुबन और भितिहरवा । कुछ निष्ठावान कार्यकर्ताओं को तीनों गांवों में तैनात किया बड़हरवा के विद्यालय में श्री बवन जी गोखले और उनकी पत्नी विदुषी अवंतिकाबाई गोखले ने चलाया। मधुबन में नरहरिदास पारिख और उनकी पत्नी कस्तूरबा तथा अपने सेक्रेटरी श्री महादेव देसाई को नियुक्त किया। भितिहरवा मैं वयोवृद्ध डॉक्टर देव और सोपन जी ने चलाया। बाद में पुंडारिक जी गए स्वयं कस्तूरबा विद्यालय आश्रम में रही और इन कर्मठ और विद्वान स्वयंसेवकों की देखभाल की।

3. हिंदी की आधुनिक कविता की क्या विशेषताएं आलोचक ने बताई है ?

उत्तर- हिंदी की आधुनिक कविता में नई प्रगीतात्मकता का उभार देखता है। वह देखता है आज के कवि को न तो अपने अंदर झांक कर देखने में संकोच है न बाहर के यथार्थ का सामना करने में हिचक अंदर न तो किसी और संदिग्ध विश्व दृष्टि का मजबूत खूंटा गाड़ने की जिद है और न बाहर की व्यवस्था को एक विराट पहाड़ के रूप में आंकने की हवस बाहर छोटी से छोटी घटना स्थिति वस्तु आदि पर नजर है और कोशिश है उसे अर्थ देने की इसी प्रकार बाहर की प्रतिक्रिया स्वरूप अंदर उठने वाली छोटी से छोटी लहर को भी पकड़ कर उसे शब्दों में बांध लेने का उत्साह है। एक नए स्तर पर कभी व्यक्तित्व अपने और समाज के बीच के रिश्ते को साधने की कोशिश कर रहा है और इस प्रक्रिया में जो व्यक्तित्व बनता दिखाई दे रहा है वह निश्चय ही नए ढंग की प्रगीतात्मकता के उभार का संकेत है।

4. कुंती का परिचय आप किस तरह देंगे ?

उत्तर- कुंती सिपाही की मां शीर्षक एकांकी में एक प्रमुख पात्र है यह एक अच्छी पड़ोसन के रूप में रंगमंच पर प्रस्तुत हुई है यद्यपि कुंती की भूमिका थोड़े समय के लिए है तब भी उसे थोड़े में आंका नहीं जा सकता वह बिशनी की पुत्री मुन्नी के विवाह के लिए चिंतित है। वह स्वयं मुन्नी के लिए वर घर खोजने को भी तैयार है वह बिशनी को सांत्वना भी देती है। बिशनीके पुत्र मानक के वर्मा की सकुशल लौटने की बात भी हुआ करती है। बिशनी के प्रति उसकी सहानुभूति उसके शब्दों में स्पष्ट दिखाई पड़ती है वह कहती है तू इस तरह दिल क्यों हल्का कर रही है कुंती वर्मा के लड़कियों के प्रति थोड़ा कठोर दिखाई देती है उनके हाव-भाव एवं पहनावे तथा भिक्षाटन पर थोड़ा क्रुद्ध भी हो जाती है। उनका इस तरह से भिक्षा मांगना कतई अच्छा नहीं लगता है। यह कहती भी है- हाय रे राम ! यह लड़कियां की……|

5. तिरिछ क्या है कहानी में यह किसका प्रतीक है ?

उत्तर- तिरिछ एक बेहद जहरीला जीव है। जिसके काटने से व्यक्ति का बचना नामुमकिन हो जाता है। यह जैसे ही आदमी को काटता है वैसे ही वहां से भाग कर किसी जगह पेशाब करता है और उस पेशाब में लेट जाता है अगर कुछ ऐसा कर दे तो आदमी बच नहीं सकता वही तिरिछ काटने के लिए तभी दौड़ता है जब उसे नजर टकरा जाए कहानी में तिरिछ का प्रतीक है। जिस भीषण यथार्थ के शिकार बाबूजी बनते हैं बेटे के सपने में तिरिछ बनकर प्रकट होता है।

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